किड्जी न्यू मंडी स्कूल में किया गया हैलोवीन पार्टी का आयोजन

किड्जी न्यू मंडी स्कूल में किया गया हैलोवीन पार्टी का आयोजन


किड्जी स्कूल में बच्चों के लिए हैलोवीन पार्टी रखी गई। जिसमें बच्चे मॉन्स्टर , ममी, ड्रैकुला , भूत आदि की पोशाक पहन कर आए। स्कूल को हैलोवीन पार्टी के अनुरूप कागज़ की मकड़ी, भूत, डायन, पम्पकिन आदि से सजाया गया । बच्चों को तरह तरह के गेम्स भी खिलाए गए । सभी बच्चों ने हैलोवीन पार्टी में खूब एंजॉय किया । घर जाते समय बच्चों को टोकन ऑफ़ लव भी दिया गया । सभी बच्चे पार्टी से खूब खुश होकर घर गए। हैलोवीन पार्टी के बारे में स्कूल की डायरेक्टर श्री मती चारु भारद्वाज जी ने बच्चों को बताया की – हैलोवीन दिवस ईसाईयों का एक त्योहार होता है, जोकि 31अक्टूबर को मनाया जाता है, अलग – अलग धर्मों के त्योहार अलग – अलग प्रकार के होते है जैसे हिन्दुओं में होली, राखी , दशहरा एवं दिवाली , राष्ट्रीय त्योहार के रूप में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस आदि और भी कई त्यौहार मनाये जाते है , इस्लाम में ईद – उल – फितर, बकरीद, मुहर्रम आदि और सिख में वैसाखी, गुरुनानक जयंती आदि उसी प्रकार ईसाईयों में भी कई प्रकार के त्योहार मनाये जाते है जैसे क्रिसमस, गुडफ्राइडे और इस्टर और उन्हीं का एक त्यौहार हैलोवीन दिवस भी है, इस त्योहार को ज्यादातार अमेरिका, इंग्लैंड व यूरोपीय देशों के लोग मनाते है, लेकिन इस त्योहार की शुरुआत आयरलैंड एवं स्कॉटलैंड से हुई है। हमे सभी धर्मो का सम्मान करना चाहिए , और सभी त्योहार मनाने चाहिए । इसलिए आज हमने हैलोवीन डे मनाया है । स्कूल की को-कोर्डिनेटर साक्षी बक्शी जी ने बच्चों को समझाते हुए कहा की – यह दिन सेल्टिक कैलेंडर का आखिरी दिन होता है, इसलिए सेल्टिक लोगों के बीच यह नए वर्ष की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है , यह फ़सल के मौसम का आखिरी दिन होता है और इस दिन से ठंड के मौसम की शुरूआत होती है, वे इस बात पर बहुत ज्यादा भरोसा करते है कि इस निर्धारित दिन पर मरे हुए लोगों की आत्माएँ उठती है और धरती पर प्रकट हो कर जीवित आत्माओं के लिए परेशानी पैदा करती हैं. इन बुरी आत्माओं से डर भगाने के लिए लोग राक्षस जैसे कपड़े पहनते हैं. इसके अलावा अलाव जलाया जाता है , और जगह – जगह पार्टी का आयोजन किया जाता है। हैलोवीन पार्टी के सफल संचालन हेतु विद्यालय कि सभी शिक्षिकाओं अरुणा, सिमरन, श्वेता , दिव्या, ऐश्वर्या, स्नेहा, तान्या, जूही, सना आदि ने पूर्ण योगदान दिया ।

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