कच्ची छत गिरने से मां-बेटी की मौत, छत के मलबे में धंसा परिवार

कच्ची छत गिरने से मां-बेटी की मौत, छत के मलबे में धंसा परिवार

 

मुजफ्फरनगर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते मकान की कच्ची छत गिर गई। मलबे के नीचे दब कर मां बेटी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। जबकि परिवार का मुखिया अक्षय गंभीर घायल हो गया। मंजर इतना भयावह था की एक सेकेंड के भीतर छत भरभरा कर गिर पड़ी और छत के नीचे सो रहे परिवार के 3 लोग मलबे में दब गए। मलवा इतना ज्यादा था कि जैसे हालत में पड़े थे वैसे ही पड़े रहे मुंह से आवाज तक भी नहीं निकली और सास भी नही लिया जा रहा था। घ्याल अक्षय जिला अस्पताल भर्ती कराया गया।

शहर कोतवाली क्षेत्र के नियाजउपुरा में शनिवार सुबह होने से पहले बड़ा हादसा हो गया। सुबह सवेरे 3:30 बजे थाना नगर कोतवाली के मोहल्ला नियाजुपुरा में एक मकान की छत गिर गई। जिसके मलबे में 26 वर्षिय महिला पूजा उसका पति अक्षय कुमार और 6 वर्षीय बेटी मानसी दब गए। घटना के बाद मोहल्ले वालों ने मलबे में दबे तीनों लोगों को कड़ी मशक्कत करके के बाद मलबे से बाहर निकाला। इस दौरान 6 वर्षीय मानसी और 26 वर्षीय मां पूजा की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। गंभीर घायल अवस्था में अक्षय को मलबे से निकालकर जिला अस्पताल भर्ती कराया। जिसे खतरे से बाहर बताया जा रहा है।

मृतक पूजा की दादी सास कमला देवी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह छत 1 सेकेंड के अंदर धम से गिर गई। इस दौरान मकान में सो रहे अक्षय पत्नी पूजा और उनकी पुत्री मानसी छत के मलबे में दब गए इस मौके पर पहुंचे मोहल्ले वासियों ने कड़ी मशक्कत कर मलबे के बीच से तीनों को निकाला और देखा की पूजा और पुत्री मानसी की मौके पर ही दबकर मौत हो गई जबकि अक्षय घायल अवस्था में कड़ी मशक्कत के बाद अक्षय को निकालकर जिला चिकित्सालय में भिजवाया जहां पर चिकित्सकों ने उसे खतरे से बाहर बताया है। पीड़ित कमला ने बताया कि घटना की जानकारी होने पर एसडीएम व पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे।

वही पीड़ित घायल अक्षय ने जानकारी देते हुए बताया कि छत का मलबा उनके ऊपर पड़ा हुआ था और वह उस मलबे में दबे होने के कारण हाथ पैर नहीं चला पा रहे थे। उन्होंने कहा कि मंजर इतना भयावह ता कि मुंह से आवाज भी नहीं निकली और सास भी नहीं लिया जा रहा था। 15-20 मिनट की कड़ी मशक्कत करने के बाद मोहल्ले वासियों ने परिवार के तीनों लोगों को बाहर निकाला। पीड़ित अक्षय ने बताया कि अभी भी ऐसा लग रहा है कि मानो छाती पर कोई बैठा हूं और सांस लेने में भी परेशानी हो रही है।

 

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