गठबंधन धर्म को दरकिनार कर मनमानी करना इस राजनैतिक पार्टी को पड़ सकता है भारी

गठबंधन धर्म को दरकिनार कर मनमानी करना इस राजनैतिक पार्टी को पड़ सकता है भारी

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी का गठबंधन भले ही लोकसभा चुनाव 2019 और विधानसभा चुनाव 2022 से बरकरार हो और आज इसी गठबंधन में आजाद समाज पार्टी को भी शामिल किया जा रहा हो मगर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कहीं ना कहीं अपने चाहते प्रत्याशी को लड़ाने के लिए गठबंधन धर्म को दरकिनार कर मनमानी करते नजर आते हैं । जहां विधानसभा चुनाव 2022 में 3 विधानसभा सीटों पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी गठबंधन में सीटों के बंटवारे से पहले ही अपने प्रत्याशी फाइनल कर दिए थे सूत्रों का तो यहां तक भी कहना था कि सीटों के बंटवारे से पहले ही इन तीनों प्रत्याशियों को सपा मुखिया द्वारा सिंबल भी जारी कर दिए गए थे जिसमें मुजफ्फरनगर की चरथावल विधानसभा सीट पर कोई विवाद नही हुआ था जिस पर अखिलेश यादव ने पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक के बेटे पूर्व विधायक पंकज मलिक को टिकट दिया था क्योंकि मुजफ्फरनगर में बाकी 5 सीटों पर राष्ट्रीय लोकदल के सिंबल पर प्रत्याशी लड़े थे जिसमें 4 सीटों पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी थे और केवल एक विधानसभा सीट पर राष्ट्रीय लोक दल का प्रत्याशी चुनाव लड़ा था जिसमें मेरठ की सिवालखास और मथुरा की मांठ सीट पर तो काफी विवाद रहा था लेकिन सपा मुखिया अखिलेश यादव की हठधर्मिता के चलते रालोद के स्थानीय प्रत्याशी योगेश नौहवार को दरकिनार किया गया और हरियाणा निवासी अपने चहते संजय लाठर की पत्नी को टिकट दे दिया था जिसकी वजह से मांठ विधानसभा सीट पर गठबंधन को करारी हार का मुंह देखना पड़ा था। हालांकि मेरठ की सीवाल खास सीट पर समीकरण के चलते गुलाम मोहम्मद रालोद के सिंबल पर जरूर जीतने में कामयाब रहे थे
अब निकाय चुनाव में भी सपा मुखिया द्वारा गठबंधन धर्म को दरकिनार करने की चर्चाएं हवा में उड़ रही है जिसमें सूत्रों के अनुसार नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर सीट पर सपा नेता राकेश शर्मा की पत्नी लवली शर्मा का टिकट लगभग फाइनल माना जा रहा है जबकि सीटों का बंटवारा अभी हुआ भी नहीं वही मेरठ से भी सरधना विधायक अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान को मेयर पद के लिए चुनाव लड़ाने की चर्चा जोरों पर है। वहीं समाजवादी पार्टी की ओर से आ रहे इन संकेतों के चलते कहीं ना कहीं राष्ट्रीय लोक दल पार्टी के खेमे में बेचैनी देखने को मिल रही है क्योंकि मुजफ्फरनगर की सीट पर राष्ट्रीय लोक दल के पदाधिकारी रालोद के चुनाव चिन्ह नल पर प्रत्याशी लड़ाना चाह रही है जबकि समाजवादी पार्टी के नेता साइकिल के निशान पर प्रत्याशी को मैदान में उतारना चाहते हैं। जनपद में चर्चाओं का एक दौर यह भी चल रहा है कि यहां मतदाताओं का झुकाव साइकिल के निशान के बजाय नल के निशान की ओर अधिक रहता है। क्योंकि अन्य पिछड़ा और दलित वर्ग के लोग साइकिल के निशान को कम पसंद करते हैं केवल एक मुस्लिम वर्ग ही ऐसा है जो साईकिल या नल दोनो ही निशानो पर मतदान करने से कतई नहीं कतराते अब देखना होगा कि अगर मुजफ्फरनगर की नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर सीट पर समाजवादी पार्टी अपना प्रत्याशी उतारती है और उसके सामने भारतीय जनता पार्टी से वैश्य समाज का कोई प्रत्याशी आता है तो यह चुनाव गठबंधन के लिए घाटे का सौदा साबित हो सकता है।

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