85 वर्षीय बुजुर्ग ने अपनी डेढ़ करोड़ की संपत्ति कर दी सरकार के नाम

85 वर्षीय बुजुर्ग ने अपनी डेढ़ करोड़ की संपत्ति कर दी सरकार के नाम


उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर में एक 85 वर्षीय बुजुर्ग के द्वारा रजिस्ट्रार के यहां जाकर अपनी डेढ़ करोड़ रुपए की संपत्ति सरकार के नाम करने का मामला सामने आया है जिसमें बताया जा रहा है कि थाना बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र के गांव बिराल निवासी 85 वर्षीय नत्थू राम ने अपने बच्चों की हरकतों से परेशान होकर अपनी संपत्ति सरकार के नाम कर दी है यही नहीं बुजुर्ग नत्थू राम ने अपने बेटों और बोटियों से सिर्फ संपत्ति ही नहीं बल्कि अंतिम संस्कार का हक भी ले लिया। बुजुर्ग ने अपनी सारी संपत्ति ( जिसमें लगभग उसकी 18 बीघा कृषि भूमि भी शामिल है ) जो उत्तर प्रदेश सरकार के नाम कर दी। नाथूराम ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल को पत्र लिखकर अपना शरीर भी यूपी सरकार को दान दे दिया। यूपी सरकार के नाम की गई वसीयत में इस बुजुर्ग नाथूराम ने कहा है कि मेरी संपत्ति के साथ-साथ मेरा शरीर भी यूपी सरकार को दे दिया जाए।
दरअसल उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर के थाना बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र के गांव बिराल निवासी 85 वर्षीय नत्थूराम ने अपनी वसीयत में लिखा है कि अब उन्हे अंतिम संस्कार की भी इच्छा नहीं रही। मरने के बाद अगर उनका शरीर किसी मेडिकल कॉलेज या शोध संस्थान में काम आ सकता है तो उनका शरीर दे दिया जाए। बुजुर्ग नत्थूराम कक्षा 12 तक पढ़े हुए हैं। इनके पास करीब डेढ़ करोड़ रुपये कीमत की चल और अचल संपत्ति है। इस संपत्ति में उनका मकान और दुकान के साथ-साथ गांव में लगभग 18 बीघा खेती की जमीन भी शामिल हैं। इनका एक बेटा है जो सहारनपुर में सरकारी शिक्षक बताया जाता है।
जानकारी के अनुसार नत्थूराम से जब इस कड़े फैंसले के बारे में पूछा गया तो बोले कि, परिवार के लोग देखभाल नहीं करते। इससे परेशान होकर उन्होंने यह कदम उठाया है। नत्थू बताते हैं कि उनकी चार बेटियां और एक बेटा है। इसके बावजूद उन्हे वृद्धा आश्रम में रहना पड़ रहा है। बेटे और बेटियां उनका ख्याल नहीं रखते। ऐसे में वह बहुत परेशान हो गए हैं। दुखी होकर ही उन्होंने अपनी संपत्ति को यूपी सरकार के नाम करने का निर्णय किया है।
वही वृद्ध आश्रम की अधीक्षिका रेखा सिंह ने बताया कि नत्थू सिंह उनके यहां लगभग 6 माह से रह रहे हैं और उन्हें पता चला है कि उन्होंने अपनी लगभग डेढ़ करोड़ की संपत्ति सरकार के नाम कर दी है उन्होंने बताया कि इनके परिवार बेटे बेटियां इनको लेने आई थी मगर यह उनके साथ नहीं गए उसके बाद जब यह बीमार हुए एक बार फिर हमने उन्हें फोन किया था जब भी वह आए थे मगर यह उनके साथ तब भी नहीं गए ने कहा कि मैं वृद्ध आश्रम में ही रहूंगा इनमें बताया इनके बेटे बेटियां और पत्नी परेशान करते हैं जिसकी वजह से इन्होंने इतना बड़ा कदम उठाया और साथ ही अपने बच्चों से अपने अंतिम संस्कार का हक भी छीन लिया इन्होंने अपना शरीर भी दान कर दिया

 

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