बाहुबली शब्द मुद्दों से भटकाने का षड्यंत्र – मदन भैय्या

खतौली क्षेत्र में आपसी भाईचारा कायम करना मेरी प्रथम प्राथमिकता।

बाहुबली शब्द मुद्दों से भटकाने का षड्यंत्र।

परेशान किसान, युवा बेरोजगार, महंगी शिक्षा और चिकित्सा, अल्पसंख्यक दलितों और पिछड़ों के मुद्दों पर चर्चा से बच रही है सत्तासीन पार्टी।
– मदन भैया प्रत्याशी रालोद सपा गठबंधन

आज मदन भैया ने अपना बयान जारी करते हुए कहा कि विपक्षियों द्वारा मुझे बाहुबली बताना उनकी हताशा का परिचायक है। सभी जानते हैं कि हमारे शुभचिंतक और समर्थक हमारे लिए कभी बाहुबली शब्द का इस्तेमाल नहीं करते।
बाहुबली शब्द का इस्तेमाल मुद्दों से भटकाने का षड्यंत्र है।
खतौली विधान सभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में रालोद सपा गठबंधन के प्रत्याशी और आजाद समाज पार्टी के समर्थित मदन भैया ने कहा कि रालोद मुखिया के परिवार को छोड़कर भाजपा में भविष्य तलाशना भटकने वालों की बड़ी भूल है। मैं जानता हूं कि रालोद परिवार से भटकने वाले भाइयों को आखिरकार भाजपा की अनदेखी से निराश होकर उन्हें एक दिन परिवार में वापस लौटना होगा। मैं तो यही कहना चाहूंगा कि अगर सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहा जाता।
मदन भैया ने कहा कि खतौली विधानसभा का चुनाव विधायकी का चुनाव नहीं बल्कि दलितों, पिछड़ों, मजलूमों, अल्पसंख्यकों, कामगारों, किसानों और बेरोजगारों के लिए हक हकूक की लड़ाई का चुनाव है।
मदन भैया ने कहा कि आरक्षण पर चाबुक चलाने वालों को, आपसी भाईचारे को खत्म करने वालों को, किसानों का दमन करने वालों को, युवाओं को बेरोजगारी परोसने वालों को, लोक लुभावने सपने दिखाने वालों को पहले ही दिन से सबक सिखाने के लिए खतौली की जनता मन बना चुकी है।
मदन भैया ने जारी बयान में कहा कि जो अन्य दलों को परिवारवाद की राजनीति करने के कटघरे में खड़ा करने वाले लोग बयान देने से पहले कम से कम इस बात पर तो गौर फरमा लिये होते कि उन्होंने खतौली से जिस उम्मीदवार को मैदान में उतारा है वह परिवारवाद का जीवंत उदाहरण है। विचारणीय प्रश्न है यह है कि देश और प्रदेश में सत्तासीन पार्टी को खतौली से उप चुनाव लड़ाने के लिए कानून की नजरों में सजा पा चुके व्यक्ति की पत्नी के अलावा कोई उम्मीदवार ही नहीं मिला। इससे ज्यादा परिवारवाद की और कुछ इंतहा नहीं हो सकती। शायद भाषण देते वक्त था इस बात को भूल गए।
सत्तासीन पार्टी को याद रखना चाहिए कि युवा पीढ़ी अब अनपढ़ नहीं है कि मुझ पर लगाए जा रहे ऊल जुलूल आरोपों पर आपके भाषणों से विश्वास कर लें। हर व्यक्ति के हाथ में मोबाइल है और सब का डाटा गूगल पर उपलब्ध है। मदन भैया ने कहा कि यह दुनिया है सब जानती है अंदर क्या है बाहर क्या है सब जानती है सबको पहचानती है।

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